लाला लाजपत राय का जीवन परिचय Lala Lajpat Rai biography in hindi

लाला लाजपत राय का जीवन परिचय  Lala Lajpat Rai biography in hindi: भारत एक महान देश है। यहाँ हर युग में महान आत्माओं ने जन्म लेकर इस देश को और भी महान बनाया है। ऐसे ही युग पुरुषों में से एक थे, लाला लाजपत राय। जो न केवल महान व्यक्तित्व के स्वामी थे, बल्कि गंभीर चिन्तक, विचारक, लेखक और महान देशभक्त थे। इन्होंने उस समय के भारतीय समाज में व्याप्त बुराईयों को दूर करने के लिये बहुत से प्रयास किये थे। इनके बोलने की शैली बहुत प्रभावशाली और विद्वता पूर्ण थी। इन्होंने अपनी भाषा-शैली में गागर में सागर भरने वाले शब्दों का प्रयोग किया। ये अपनी मातृ भूमि को गुलामी की बेड़ियों में जकड़े हुये देखकर स्वंय के जीवन को धिक्कारते थे और भारत को आजाद कराने के लिये आखिरी सांस तक संघर्ष करते हुये शहीद हो गये।
लाला लाजपत राय का जीवन परिचय  Lala Lajpat Rai biography in hindi

लाला लाजपत राय का जीवन परिचय  Lala Lajpat Rai biography in hindi

भारत के शेर-ए-पंजाब, पंजाब केसरी की उपाधि से सम्मानित महान लेखक और राजनीतिज्ञ लाला लाजपत राय का जन्म 28 जनवरी 1865 को पंजाब राज्य के फिरोजपुर जिले के धुड़ीके गाँव में हुआ था। इनका जन्म अपने ननिहाल (इनकी नानी के घर) में हुआ था। उस समय ये परम्परा थी कि लड़की के पहले शिशु का जन्म उसके अपने घर में होगा, इसी परम्परा का निर्वहन करते हुये इनकी माँ गुलाब देवी ने अपने मायके में अपने पहले बच्चे को जन्म दिया। लाला लाजपत राय का पैतृक गाँव जगराव जिला लुधियाना था, जो इनके ननिहाल (धुड़ीके) से केवल 5 मील की दूरी पर था।

लाला लाजपत राय बाल्यास्था के प्रारम्भिक दिनों में अच्छे स्वास्थ्य वाले नहीं थे, क्योंकि इनका जन्म स्थान एक मलेरिया ग्रस्त क्षेत्र था। बचपन में ये बहुत ही अस्वस्थ और अक्सर मलेरिया से पीड़ित रहते थे।

पारिवारिक वातावरण का लाजपत पर प्रभाव

बालक लाजपत के बाल मन पर उनके पारिवारिक वातावरण का गहरा प्रभाव पड़ा। इन्होंने अपने पिता को इस्लाम धर्म के नियमों का पालन करते देखा। इनके दादा पक्के जैनी थे और जैन धर्म के नियमों का पालन करते थे। इनकी माता गुलाब देवी सिख धर्म को मानने वाली थी और नियमपूर्वक सिख धर्म से जुड़े जाप व पूजा-पाठ करती थी। यही कारण था कि बालक लाजपत के मन में धार्मिक जिज्ञासा और उत्सुकता बढ़ गयी जो चिरकाल (बहुत लम्बे समय) तक बनी रही। प्रारम्भ में ये भी अपने पिता की तरह नमाज पढ़ते और कभी-कभी रमजान के महीने में रोजा भी रखते थे। कुछ समय बाद ही इन्होंने इस्लामी रस्मों को छोड़ दिया।

लाला लाजपत राय की प्रारम्भिक शिक्षा

लाला लाजपत राय की प्रारम्भिक शिक्षा रोपड़ के स्कूल में हुई। कुरान, शाहनामा व इतिहास की अन्य पुस्तकों को पढ़ने में संलग्न होने और मलेरिया से पीड़ित होने पर भी ये अपनी पाठ्य पुस्तकों को बहुत रुचि के साथ पढ़ते थे। इन्होंने कभी भी अपने पाठ्य क्रम को भंग नहीं होने दिया। ये पूरे स्कूल में सबसे कम आयु के थे और हमेशा अपनी क्लास में पहले स्थान पर रहते थे।

इनके पिता राधाकृष्ण इन्हें घर पर भी शिक्षा दिया करते थे जिससे इनकी स्कूली शिक्षा में सहायता मिलती थी। लाजपत राय शुरु से ही मेधावी छात्र थे और अपने पिता की ही तरह अपनी क्लास में सबसे पहले स्थान पर आते थे। इनके पिता ने इन्हें गणित, भौतिक विज्ञान के साथ ही इतिहास तथा धर्म की भी शिक्षा दी।

रोपड़ स्कूल 6 क्लास तक ही था। यहाँ से शिक्षा पूरी करने के पश्चात इन्हें आगे की पढ़ाई के लिये लाहौर भेज दिया गया। शिक्षा विभाग की ओर से इन्हें सात रुपये मासिक की छात्रवृति दी गयी तो ये लाहौर से दिल्ली आ गये। इन्होंने दिल्ली में रहकर 3 महीने तक अध्ययन किया पर यहाँ की जलवायु इनके स्वास्थ्य के अनुकूल नही थी जिस कारण ये बीमार हो गये और अपनी माता के साथ अपने गाँव जगराव आ गये। 

दिल्ली छोड़ने के बाद इन्होंने मिशन हाई स्कूल लुधियाना में प्रवेश लिया और मेधावी छात्र होने के कारण यहाँ भी इन्हें छात्रवृति प्राप्त हुई। वर्ष 1877-78 में लाजपत ने मिडिल की परीक्षा उत्तीर्ण की, इसी वर्ष इनका विवाह राधा देवी से हुआ। यही से ही इन्होंने मैट्रीकुलेशन की भी परीक्षा उत्तीर्ण की। बीमारी ने इनका पीछा यहाँ भी नहीं छोड़ा, फलस्वरुप कुछ समय बाद ही इन्हें मजबूर होकर स्कूल छोड़ना पड़ा। इसी समय इनके पिता का स्थानान्तरण शिमला से अम्बाला हो गया और इनका पूरा परिवार वहीं पहुँच गया।

हिन्दी आन्दोलन (1882)

राष्ट्र प्रेम की भावना से प्रेरित होकर लाला लाजपत राय बहुत जल्दी ही हिन्दी आन्दोलन के प्रचारक बन गये। इनके साथ-साथ ही इनके दो मित्रों गुरुदत्त व हंसराज के सार्वजनिक जीवन का प्रारम्भ भी हिन्दी आन्दोलन के द्वारा हुआ। गुरुदत्त और लाला लाजपत राय हिन्दी के पक्ष में मेमोरियल के लिये हजार हस्ताक्षर एकत्र (इकट्ठा) करने में संलग्न थे।

1882 में लाला लाजपत राय का अम्बाला में हिन्दी के पक्ष में पहला सार्वजनिक भाषण हुआ। इस भाषण के श्रोताओं में मजिस्ट्रेट भी शामिल थे, जिन्होंने इस भाषण की रिपोर्ट बना कर गवर्नमेंट कॉलेज के प्रिंसीपल के पास भेज दी। जिस कारण इन्हें प्रिंसीपल द्वारा ऐसे आन्दोलनों से दूर रहने की चेतावनी भी दी गयी।

लाला लाजपत राय का योगदान

1. स्वामी दयानंद सरस्वती ने स्थापन किया हुवा ‘आर्य समाज’ सार्वजनिक कार्य आगे था. आर्य समाज के विकास के आदर्श की तरफ और समाज सुधार के योजनाओं की तरफ लालाजी आकर्षित हुए. वो सोला साल की उम्र में आर्य समाज के सदस्य बने.

2. 1882 में हिन्दी और उर्दू इनमें से कीस भाषा मान्यता होनी चाहिये, इस विषय पर बड़ी बहस चल रही थी. लालाजी हिन्दी के बाजु में थे. उन्होंने सरकार को वैसा एक अर्जी की और उस पर हजारो लोगो की दस्तखत ली.

3. 1886 में कानून की उपाधि परीक्षा देकर दक्षिण पंजाब के हिस्सार यह उन्होंने वकील का व्यवसाय शुरु किया.

4. 1886 में लाहोर को आर्य समाज की तरफ से दयानंद अँग्लो-वैदिक कॉलेज निकालनेका सोचा. उसके लिए लालाजी ने पंजाब में से पाच लाख रुपये जमा किये. 1 जून 1886 में कॉलेज की स्थापना हुयी. लालाजी उसके सचिव बने.

5. आर्य समाज के अनुयायी बनकर वो अनाथ बच्चे, विधवा, भूकंपग्रस्त पीडीत और अकाल से पीड़ित इन लोगो की मदत को जाते थे.

6. 1904 में ‘द पंजाब’ नाम का अंग्रेजी अखबार उन्होंने शुरु किया. इस अखबार ने पंजाब में राष्ट्रीय आन्दोलन शुरु किया.

7. 1905 में काँग्रेस की ओर से भारत की बाजू रखने के लिये लालाजी को इग्लंड भेजने का निर्णय लिया. उसके लिये  उनको जो पैसा दिया गया उसमे का आधा पैसा उन्होंने दयानंद अँग्लो-वैदिक कॉलेज और आधा अनाथ विद्यार्थियों के शिक्षा के लिये दिया. इंग्लंड को जाने का उनका खर्च उन्होंने ही किया.

8. 1907 में लाला लाजपत रॉय किसानो को भडकाते है, सरकार के विरोधी लोगों को भड़काते है ये आरोप करके सरकार ने उन्हें मंडाले के जेल में रखा था. छे महीनों बाद उनको छोड़ा गया पर उनके पीछे लगे हुये सरकार से पीछा छुड़ाने के लिये वो अमेरिका गये.

वहा के भारतीयों में स्वदेश की, स्वातंत्र्य का लालच निर्माण करने के उन्होंने ‘यंग इंडिया’ ये अखबार निकाला. वैसेही भारतीय स्वातंत्र्य आंदोलन का गति देने के लिये ‘इंडियन होमरूल लीग’ की स्थापना की.

9. स्वदेश के विषय में परदेश के लोगों में विशेष जागृती निर्माण करके 1920 में वो अपने देश भारत लौटे. 1920 में कोलकाता यहाँ हुये कॉग्रेस के खास अधिवेशन के लिये उन्हें अध्यक्ष के रूप में चुना गया. उन्होंने असहकार आंदोलन में हिस्सा लिया और जेल गए. उसके पहले लालाजी ने लाहोर में ‘तिलक  राजनीती शास्त्र स्कुल’ नाम की राष्ट्रिय स्कुल शुरु किया था.

10. लालाजी ने ‘पीपल्स सोसायटी’ (लोग सेवक संघ) नाम की समाज सेवक की संस्था निकाली थी.

11. 1925  में कोलकाता में हुये ‘हिंदु महासभा’ के आन्दोलन के अध्यक्ष स्थान लालाजी ने भुशवाया.

12. 1925 में ‘वंदे मातरम’ नाम के उर्दू दैनिक के संपादक बनकर उन्होंने काम किया.

13. 1926 में जिनिव्हा को आंतरराष्ट्रिय श्रम संमेलन हुवा. भारत के श्रमिको के प्रतिनिधी बनकर लालाजीने  उसमे हिस्सा लिया. ब्रिटन और प्रान्स में हुये ऐसे ही संमेलन में उन्होंने हिस्सा लिया.

14. 1927 में भारत कुछ सुधारना कर देने हेतु ब्रिटिश सरकार ने सायमन कमीशन की नियुक्ती की पर सायमन कमीशन सातों सदस्य अग्रेंज थे. एक भी भारतीय नहीं था. इसलिये भारतीय राष्ट्रिय कॉग्रेस ने सायमन कमीशन पर बहिष्कार डालने का निर्णय लिया.

लाला लाजपत राय की मृत्यु

30 अक्तुबर १९२८ में सायमन कमीशन पंजाब पोहचा. लोगोंने लाला लाजपत रॉय इनके नेतृत्व में निषेध के लिये बहोत बड़ा मोर्चा निकाला. पुलिस ने किये हुये निर्दयी लाठीचार्ज में लाला लाजपत रॉय घायल हुये और दो सप्ताह के बाद अस्पताल में उनकी मौत हुयी.
लाला लाजपत राय का जीवन परिचय Lala Lajpat Rai biography in hindi लाला लाजपत राय का जीवन परिचय  Lala Lajpat Rai biography in hindi Reviewed by Admin on April 16, 2018 Rating: 5

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