हरभजन सिंह का जीवन परिचय | हरभजन सिंह की जीवनी | Harbhajan Singh Biography

हरभजन सिंह का जीवन परिचय | हरभजन सिंह की जीवनी | Harbhajan Singh Biography: मुश्किलों से भाग जाना आसान होता है, हर पहलू जिंदगी का इम्तिहान होता है, डरने वालों को मिलता नहीं कुछ जिंदगी में, लड़ने वालों के कदमों में जहां होता है।….. जी हाँ, कुछ ऐसे ही है, भारतीय क्रिकेट टीम के फिरकी किंग हरभजन सिंह । जिनके जिंदगी में कदम-कदम पर मुसीबतों ने दस्तक दिया। पर पाजी कभी नहीं रुके। और पिता की मौत के बाद वे अपने परिवार की बागडोर संभालते हुए विश्व क्रिकेट में जीत का तिरंगा का फहराने में कामयाब रहे।
हरभजन सिंह का जीवन परिचय | हरभजन सिंह की जीवनी | Harbhajan Singh Biography

हरभजन सिंह का जीवन परिचय | हरभजन सिंह की जीवनी | Harbhajan Singh Biography

हरभजन सिंह का जन्म जालंधर, पंजाब के एक सिख परिवार में हुआ था। पिता सरदार सरदेव सिंह प्लाहा एक बिजनेसमेन थे, जो दो कंपनियों को रन किया करते थे।

माँ अवतार कौर एक हाउसवाइफ़ है। परिवार में हरभजन के अलावा चार बहनें है, जिनमें तीन बड़ी बहनें है और एक छोटी बहन है। हरभजन सिंह का बचपन का नाम सोनू था। उनकी माँ उनका बचपन याद करते हुए कहती है, सोनू बचपन से ही खेलों के प्रति रुचिकर था। वह कब्बड़ी, जुड़ों, कराटे, क्रिकेट और भंगरा आदि को बड़े चाव से खेला करता था। आगे उनकी माँ कहती है, एक दिन उसने अपने पिता कहा कि वह क्रिकेटर बनना चाहता है। पिता ने कहा कि उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। तब उसके कजन, करतार ने, जो एक बैडमिंटन कोच था, उसे एक क्रिकेट कोच के पास ले गया।

वह कोच थे चरणजीत सिंह बुल्लर, जिन्हें लगा कि वह बैटिंग सीखना चाहते है, इसलिए वे उन्हें बैटिंग सीखाने लगे। पर कुछ सालों के बाद बुल्लर का निधन हो गया। इस दौरान सोनू भी क्रिकेट से कनी काटने लगे। पिता समझ गए। उन्होंने कहा सोनू, मेरी तमन्ना है कि आप क्रिकेट में इंडिया को रिप्रेजेंट करो। उन्होंने अपने पिता की बात मानी और वे अपने कजन के साथ नए कोच, दविंदर अरोरा के पास क्रिकेट सीखने के लिए आ गए।n
पहले दिन से ही सोनू अपनी बॉलिंग से कोच को प्रभावित करने लगे। उनके नए कोच अरोरा कहते है.

पहले दिन से ही भज्जी ने बॉलिंग में अच्छे परफ़ोर्मेंस दिये। ट्रेनिंग सेशन में उनके लिए तीन घंटे एक सीध में और एक घंटा सिंगल विकेट पर बॉलिंग करने के लिए निर्धारित था। कोच अरोरा उनके कठिन दिनचर्या की बात करते हुए आगे कहते है, वह रोज लगभग 11 बजे प्लेग्राउंड में आ जाता था। बाद में साथी बच्चे भी आते थे। फिर वह प्रैक्टिस कर लंच में लौट जाता था। लंच के बाद 3 बजे ग्राउंड में लौट वह दुबारा अपने प्रैक्टिस को जारी रखता था। यह प्रैक्टिस सेशन देर शाम तक चलता था।

अपने पिता के सपनें के साथ जीने वाले हरभजन सिंह बचपन से अपने इरादों के पक्के थे। जिस कारण वह बीमार होने पर भी एक भी दिन प्रैक्टिस सेशन नहीं छोड़ते थे, जबकि उन्हें अपने घर से साईकिल द्वारा दिन में तीन बार दौलतपुर स्थित प्रैक्टिस ग्राउंड में जाना पड़ता था। वैसे तो वे दिन की जंग जीतते ही थे, पर अंधेरे में भी जंग जीतने का दमखम रखते थे। जब कभी शाम में लाईट चला जाता तो पार्क मेँ खड़े स्कूटर की हेडलाईट जलाकर अपनी बॉलिंग प्रैक्टिस किया करते थे।

15 साल की उम्र मेँ उन्हें हरियाणा के विरुद्ध पंजाब अंडर-16 के लिए डेब्यु करने का मौका मिला, जहां उन्होंने कमाल की बॉलिंग करते हुए 46 रन देकर 7 विकेट्स और 138 रन देकर 5 विकेट्स चटकाये। शानदार डेब्यु का असर दूसरे मैच मेँ भी बरक़रार रहा, जहां उन्होंने दिल्ली के विरुद्ध खेलते हुए 56 रन भी बनाये और घातक बॉलिंग का मुजाहायरा भी किया। इसी तरह उन्होंने तीसरे मैच मेँ भी हिमाचल प्रदेश के विरुद्ध 11 विकेट लेकर पंजाब को धमाकेदार इननिंग जीत दिलाया। इस अवार्ड विनिंग परफ़ोमेंस के कारण उन्हें जल्दी ही नॉर्थ जॉन अंडर-16 के लिए चुन लिया गया। जहां उन्होंने उस वन डे मैच सीरीज मेँ औसत प्रदर्शन करते हुए दो विकेट चटकाये और 18 रन बनाये।

India Under-19 Debut

फिर उन्हें कुछ ही महीनों के बाद इंडिया अंडर-19 की ओर से साऊथ अफ्रीका के विरुद्ध एक ओडीआई मैच खेलने को मौका मिला। इस मैच मेँ वे सात ओवर मेँ 19 रन देकर एक विकेट लेने में कामयाब रहे। साथ ही इंडिया भी जीतने में सफल रहा। हरभजन सिंह के लगातार उम्दा बॉलिंग परफ़ोर्मेंस का ही प्रभाव था, जिसके कारण वे डेब्यु के कुछ समय बाद ही वे कई टीमों के लिए खेल चुके थे। इसी क्रम उन्हें 1997-96 में पंजाब-19 की ओर जम्मू-कश्मीर के विरुद्ध खेलने का मौका मिला। इस मैच के एक इननिंग में उन्होंने 54 रन बनाकर और 8 विकेट लेकर, एक बार और पंजाब को धमाकेदार जीता दिलाया।

जल्द ही उन्हें इसका बड़ा ईनाम, जब सर्विसेज के विरुद्ध फ़र्स्ट क्लास मैचों में डेब्यु करने का मौका मिला। उस मैच में उन्होंने 3/35 की बॉलिंग फिगर से उम्दा बॉलिंग किया। पर उन्हें अगले ही सप्ताह वापस पंजाब अंडर-19 टीम में बुला लिया गया।इस केटेगरी में उन्होंने दो मैच खेलते हुए 5/75 और 7/44 जैसे बेहतरीन बॉलिंग फिगर से बॉलिंग कर दुबारा सीनियर टीम में अपना जगह बनाया और पुरे साल शानदार परफ़ोर्मेंस किया, जिसके बदौलत वे भारतीय टूर पर आए ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 25 मार्च 1998 में डेब्यु करने में सफल रहे। पर वे इस मैच में दो विकेट लेकर अपना औसत परफ़ोर्मेंस ही दे सके।

ODI Debut

उन्हें एक महीने बाद ही न्यूजीलैंड के खिलाफ ओडीआई मैचों में डेब्यु करने का मौका मिला। पर वे इस मैच में एक ही विकेट ले सके, लेकिन 3.20 की सस्ते रन रेट से सबको प्रभावित करने में सफल रहे।

विकेटों का सूखा

हरभजन सिंह के लाइफ में एक ऐसा भी समय आया, जब उनका बॉलिंग परफ़ोर्मेंस पूरी तरह से बेपटरी हो गया। वह साल था 1999-2000 का। जब उन्हें कई सीरिजों में विकेटों के भीषण सूखे का सामना करना पड़ा। इसके परिणामस्वरूप उन्हें टीम से निकाल दिया गया। पर सन 2000 के मध्य में वे अपने बॉलिंग फॉर्म को सुधारने में कामयाब रहे। उसी साल उन्होंने बोर्ड प्रेसिडेंट 11की ओर से खेलते हुए साउथ अफ्रीका के खिलाफ दोनों पारियों में क्रमश: 2/88 और 2/59 की अच्छी बॉलिंग फिगर से बॉलिंग किया और 38 और 39 रन भी बनाये। जिसके कारण उनकी टीम साउथ अफ्रीका को हारने में कामयाब रही। पर उन्हें राष्ट्रीय टीम में जगह ना मिला सका। उनकी जगह मुरली कार्तिक को मौका दिया गया।

फिर वे भारत लौट आए और घरेलू टीम के लिए खेलने लगे। कुछ समय बाद वे अपना पुराना लय पाते हुए पंजाब की ओर से खेलते हुए चार फ़र्स्ट क्लास मैच में 24 विकेट्स लिये। इसी बीच उन्हें National Cricket Academy में 1970 में भारतीय टीम का हिस्सा रहे ऑफ स्पिनर श्रीनिवास वेंकटराघवन और इरापली प्रसन्ना से बॉलिंग गुर सीखने को मौका मिला। पर अनुशासनहीनता के कारण उन्हें Academy से निकाल दिया गया। इस कारण हरभजन सिंह का टीम इंडिया में चयन होने का जो भी बची-खुची संभावना थी, वो भी खत्म हो गई।

इसी साल उनपर एक बड़ी मुसीबत टूट भी पड़ी, जब उनके पिता का निधन हो गया और उनके 4 कुंवारी बहनों वाले परिवार का इकोनोमी बिगड़ गया। परिवार में अकेले बेटे, हरभजन सिंह पैसा कमाने के लिए अमेरिका में ट्रक चलाने की सोचने लगे।

ऐसे में वर्तमान कप्तान बंगाल टाइगर सौरव गांगुली सामने आए। वे उनकी टीम में सेलेकशन के लिए लगातार लड़ते रहे। पर इस कठिन परिस्थितियों में भी हरभजन ने अपने बॉलिंग पर से फोकस नहीं हटाया और डोमेस्टिक क्रिकेट में अपनी पुरानी लय पूरी तरह से पाने में सफल रहे।

उनके अगले चार फ़र्स्ट मैचों की बॉलिंग फिगर कुछ इस तरह रही, हिमाचल प्रदेश के विरुद्ध 3/29 और 3/39, जम्मू-कश्मीर के खिलाफ 2/53 और 5/88, हरियाणा के विरुद्ध 4/77 और 2/23 और सर्विसेज के खिलाफ 5/40। इन सभी मैचों में पंजाब हरभजन सिंह की बेस्ट बॉलिंग परफ़ोर्मेंस के कारण पारी से जीता। इतनी बेहतरीन बॉलिंग परफ़ोर्मेंस के बावजूद भी उनकी टीम इंडिया में सेलेक्शन को लेकर संशय बना बना रहा और गांगुली भी उनके सेलेक्शन को लेकर प्रयासरत थे।

टीम इंडिया में रिएंट्री और Hat-trick

आखिरकार दोनों की कड़ी मेहनत को समय ने स्वीकारा। उसी वक्त 2001 बोर्डर-गावस्कर ट्रॉफी से ठीक पहले जम्बो अनिल कुंबले को इंजरी हुई। जिसका फायदा हरभजन सिंह को हुआ। उन्हें टीम में चुन लिया गया। उन्होंने पहले ही टेस्ट मैच में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 3/8 और 4/141 की बेहतरीन बॉलिंग फिगर से बॉलिंग करते हुए अपने आक्रामक इरादों को जत्ताया।पर यह मैच भारत हार गया। इसी बीच भारत के लिडिंग फास्ट बॉलर जवागल श्रीनाथ को फिंगर इंजरी के कारण पूरे से सीरीज से हटना पड़ा।

अब हरभजन सिंह पर भारतीय बॉलिंग संभालने की बड़ी ज़िम्मेदारी आ गई। उन्होंने इस ज़िम्मेदारी को बखूबी समझा और दूसरे टेस्ट मैच में कैरियर बेस्ट पर्फ़ोमेंस देते हुए ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहली पारी में सात विकेट झटके और इस मैच में पहली हैट-ट्रिक विकेट पूरा कर हैट-ट्रिक लेने वाले पहले भारतीय होने का गौरव पाया। दूसरी पारी में भी वे 6 विकेट लेकर अपना जादू जारी रखा।

इसी तरह तीसरे मैच में उन्होंने पहली पारी में 133 रन देकर 7 विकेट और दूसरी पारी में 84 रन देकर 8 विकेट्स लेकर ऑस्ट्रेलिया का कमर तोड़ दिये और भारत को इनिंग विन और सीरीज विन दिलाने में सफल रहे। इस सीरीज में हरभजन सिंह मेन ऑफ द मैच और मेन ऑफ द सीरीज घोषित किए गए। इस सीरीज ने उनके जिंदगी को बदल कर रख दिया। भारत सरकार और राज्य सरकार द्वारा उनके लिए इनामों की झड़ी लग गई। बेपटरी हुई उनके परिवार की जिंदगी भी फिर से खुशहाल हुई। उन्होंने अपने बड़ी बहनों को शादी करवाकर पिता और भाई, दोनों का दायित्व निभाया।

अब टीम में उनकी पक्की जगह हो चुकी थी। पर उनके कैरियर में उत्तार-चढ़ाव लगा रहा। खैर यह जीवन का दस्तूर है।

T-20 Debut

बरहाल 2006 में उन्होंने साउथ अफ्रीका के खिलाफ टी-20 मैचों में डेब्यु किया।

IPL Debut

इसके साथ ही वे 2008 में मुंबई इंडियंस की ओर से आईपीएल में डेब्यु किया। जहां वे अपनी बेहतरीन परफ़ोर्मेंस के साथ श्रीसंत-थपड्ड कांड के कारण भी काफी सुर्खिया बटोरे। आईपीएल कैरियर में अब तक वे 119 विकेट्स और 783 रन बना चुके है। इसके साथ ही वे मुंबई इंडियंस की कप्तानी भी कर चुके है और दो बार आईपीएल का खिताब जीतने में अपनी टीम में अहम योगदान दे चुके है।

World Cup

हरभजन सिंह वर्ल्ड कप 2007 और 2011 के हिस्सा रह चुके है। पर 2007 का वर्ल्ड कप बुरे सपने जैसा था, जहां उन्हें विकटों के सुखों का सामना करना पड़ा। पर 2011 का वर्ल्ड कप उनके लिए संजीवनी बूटी रही। यहाँ वे अपना उम्दा परफ़ोर्मेंस देने में सफल रहे और साथ ही टीम इंडिया भी वर्ल्ड कप जीतने में भी कामयाब रहा।

हरभजन सिंह Vs Australia And Ricky Ponting

अपने कैरियर में हरभजन सिंह ऑस्ट्रेलिया और रिकी पोंटिंग के खिलाफ सबसे ज्यादा सफल रहे है। उन्होंने टेस्ट मैच में रिकॉर्ड दस बार रिकी पोंटिंग को आउट कर चुके है और साथ ही वे अपना 50 वां, 250 वां और 300 वां विकेट रिकी पोंटिंग के विकेट से ही पूरा किया।इसलिए खौफजद्दा ऑस्ट्रेलिया वालों ने उनका टरबनेटर नाम रखा दिया, क्योंकि सिख के धर्म अनुसार वे मैचों में काली पगड़ी पहनते है। जबकि टीम इंडिया उन्हें भज्जी या भज्जी पाजी कहते है।

World No -2 Off Spinner

ऑल राउंडर बनने की चाह रखने वाले हरभजन सिंह एक ऑफ स्पिनर के रूप में मुथेया मुरलीधरन के बाद टेस्ट मैचों में 417 विकेट्स लेकर दुनियाँ में दूसरे सबसे अधिक विकेट लेने वाले बॉलर है। साथ ही वे टेस्ट मैचों दो सेंचुरी भी मार चुके है।

व्यक्तिगत जीवन

स्वभाव से आक्रामक हरभजन सिंह अपने ईमोशन्स पर काबू नहीं रख पाते है। पर वे एक बेहतरीन क्रिकेटर होने के साथ एक अच्छे बेटे और एक जिम्मेदाराना भाई है। तभी तो जब परिवार पर आर्थिक संकट आया तो वे क्रिकेट छोड़कर अमेरिका में ट्रक चलाने की सोचने लगे। बरहाल मस्ती मूड में रहने वाले भज्जी 2007 में दिल दिया है फिल्म से डेब्यु करने वाली बॉलीवुड एक्ट्रेस गीता बसरा से एक इवेंट में मिले थे और वहीं पर दोनों एक दूसरे को दिल दे बैठे।

काफी देट्स और इंतजार के बाद दोनों 29 अक्तूबर 2015 को शादी के बंधन में बंध गए। जिनकी शादी पर विराट कोहली, युवराज सिंह, शिखर धवन, सुरेश रैना और रवीद्र जडेजा ने खूब धमाल मचाया। रंगीन मिजाज वाले हरभजन सिंह फिल्मों में भी हाथ आजमा चुके है। उनकी फिल्में है – मुझसे शादी करोगी, भाजी इन प्रोब्लेम और सेकंड हैंड हसबेंड ।
हरभजन सिंह का जीवन परिचय | हरभजन सिंह की जीवनी | Harbhajan Singh Biography हरभजन सिंह का जीवन परिचय | हरभजन सिंह की जीवनी | Harbhajan Singh Biography Reviewed by Admin on April 02, 2018 Rating: 5

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